सोमवार, 18 मई 2009

चुनावो का अजीब संयोग

अब जबकि देश में यूपीए की सरकार बन गई है तब किसी ने सोचा कि श्रीलंका में प्रभाकरण का खेल खत्‍म हो गया है प्रभाकरण के पक्ष या विपक्ष में होने के अलग अलग तर्क हो सकते है लेकिन जिस प्रभाकरण ने चुनाव का सहारा लेकर पूर्व प्रधानमन्त्री राजीव गान्‍धी की निर्मम हत्‍या की और भारत को 20 साल कर उठापटक की राजनीति में धकेल दिया उसी प्रभाकरण की कहानी भारत में स्‍थायी सरकार बनने की सम्‍भावना के साथ ही खत्‍म होगई क्‍या ये मात्र सयोंग है या राजनीति की बिसात पर अनुभवी खिलाडी की एक और जर्बदस्‍त चाल ।

जिस लिटटे को बचाने के लिये निर्दोष तमिल की रक्षा के नाम पर भारत की वायुसेना ने भोजन सामग्री के नाम पर अपनी ताकत दिखाई उसकी बजह क्‍या थी और इस बार वो वजह क्‍यो गायब हो गई । लगता है कि भारत अब अनुभवी हाथों में है जो धोखा देने वालो को बक्‍शने के मूड में कतई नहीं है

रविवार, 10 मई 2009

वरूण गान्‍धी

वरूण गान्‍धी जब परिवार कल्‍याण कार्यक्रम और अनिवार्य सैन्‍य सर्विस की बातें कर रहे है तो क्‍या वे भारतीय जनमानस को टच कर रहे या फिर केवल विवादो को हवा दे कर राजनीति चमकाना चाह रहे है
आपके अमूल्‍य विचार की प्रतीक्षा में हूँ

रविवार, 14 दिसंबर 2008

आतँकवाद

जब सब तरफ आतँकवाद का शोर मचा है और मुम्‍बई में हमारे प्रभु वर्ग पर हमला हुआ है तबसे सब आतँकवाद की ही चर्चा कर रहे है तो मैं भी सोचता हूँ कि बहती गंगा में अपनी काली जुबान धो हर डालूं ।

अपना विचार है कि मुम्‍बई का हमला देश के लिये वरदान साबित हो सकता है अगर हमारे प्रभु वर्ग की आँखे खुल जाये और आतँकवाद पर गम्‍भीरता से सोचने लगे ।

अपना विचार है कि ये हमला तीसरे विश्‍व युद्व का पर्ल हार्बर है जिसके कारण अब भारत को गम्‍भीरता से विचार करना ही होगा कि अब उदासीनता की नीति जारी रखी जाये या कुछ किया जायें । तीसरा विश्‍वयुद्व शूरू हो गया है ये बात मै इसलिये कह रहा हूँ कि आतँक से आज पूरे विश्‍व में आप कही भी सुरक्षित नहीं है जहॉं बम नही फटते वहॉं विचारों में जंग है

अमेरिका की अतुलनीय सैन्‍य ताकत का मुकाबला करने के लिये आतँकवादियों ने धर्म का सहारा लिया है और उसे तकनीक के साथ मिलाते हुये बराबरी की टक्‍कर दे रहे है

धर्म हर व्‍यक्ति का पर्सनल मामला होता है लेकिन मुस्लिम समाज में धर्म व्‍यक्तिगत मामला न होकर एक पार्टी राजनैतिक दल की तरह कार्य करता है और अपने अनुयायियों की व्‍यक्तिगत आजादी खत्‍म करके कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की तरह कार्य करने लगता है और अन्‍य मत मानने वालों को विरोधी समझने लगता है ।

ये मुम्‍बई हमला मुख्‍यत भारत की अवधारणा पर चोट है भारत की मूल धारणा मेरी समझ में यह है कि हर विचार और मत का सम्‍मान किया जाना चाहिये और भारत हर उस इन्‍सान का देश है जो वसुधैव कुटुम्‍बकम में विश्‍वास करता है भारत केवल हिन्‍दु धर्म का देश नहीं है बल्कि वसुधैव कुटुम्‍बकम की धारणा में विश्‍वास रखने वाले हिन्‍दुओं का देश है और आतँकवादियों ने बम धमाके करके भारतवासियों की इस धारणा को बदलने का प्रयास किया है

उनकी साफ कूटनीति है कि या तो बदलो या फिर अकर्मण्‍य बन कर नष्‍ट हो जाओ ।

देखते है कि आने वाले वर्षो में भारत इसका क्‍या उत्‍तर देता है